10 हफ्ते 10 कहानियाँ : अगर आप अपने सपनो को नही छोड़ोगे तो वो भी आपको नही छोडेंगे – श्वेता सिंह

सफर भी माँगता है मेहनत बेहद कढ़ी,
मंज़िले मन्नत के सहारे मिला नही करती -Kashish Parwani

अपने सपनो का कभी बैक अप तैयार नही करे। अपना 100% उसी में लगाये। अब करना है तो यही करना है। ये कहना है हमारे आज के युथ आइकॉन श्वेता सिंह का। हमारी खास सीरीज़ “10 हफ्ते 10 कहानियां ” में आज हमारे साथ है श्वेता सिंह। जिन्होंने हमारे साथ अपने कई विचारो को साझा किया।

तो कहाँ कैसे ये सफर शुरू हुआ

सफर तो ऐसे शुरू हुआ कि जब मैं 11 क्लास में थी तब मैंने अपनी पहली पोएट्री लिखी थी। आरजे राहुल का शो आता था और जब वो शेर बोलते थे तो मुझे भी कई थॉट्स आते थे और मैं लिखने लगी,पर कभी सोचा नही था जिन कविताओ को मैं लिखती हूँ एक समय वही कविताएं मेरी किस्मत लिखेंगी। मैंने Btech किया और तब भी ये साइड ही चल रहा था। फिर जॉब की और सोचा कि मंडे से फ्राइडे तक काम और वीकेंड पर ओपन माइक करेंगे ताकि बैलेंस बना रहे। फिर 3 हफ्ते में ही एक सफोकेशन जैसा लगने लगा। ऐसा लग रहा था कि कुछ तो गलत हो रहा है जो समझ नही आ रहा। बस फिर जॉब छोड़ी और इसी काम मे लग गयी। ऐसा ही कि मैं पोएट्री के पास नही गयी वो खुद मेरे पास आई है।

अब तक का सबसे बड़ा अचीवमेंट क्या है ??

अचीवमेंट तो अभी करनी है। छोटी छोटी सी चीज़े है जो काफी मायने रखती है। मैं एक ऐसे परिवार से हूँ जहाँ लगता है अच्छी जॉब मिल जाये बस बहुत है। पर मेरे साथ अलग था मैं जब भी टीवी देखती थी तो उस कैमरे के पीछे की दुनिया मुझे अपनी ओर खींचती थी। तो ये सब मेरी लिमिट से बाहर था। और बात की जाए अचीवमेंट की मेरी सबसे बड़ी अचीवमेंट है लोग। अब ऐसा कोई शहर नही है जहाँ मेरे घर नही है। लोगो का प्यार पाया है।

आपके हिसाब से सक्सेस क्या है ??

सबके लिए सक्सेस अलग अलग होती है किसी के लिए दौलत किसी के लिए नाम तो किसी के लिए सुकून है। जब लगे न पेट भर गया है भूख मिट चुकी है चाहे किसी भी चीज़ की हो तो ये सक्सेस है। जब कोई तलब बाकी नही हो। पर अभी मेरा पेट नही भरा है।

ज़िन्दगी क्या है ??

ज़िन्दगी एक सफर है। जिसका स्टार्टिंग पॉइंट और एंडिंग पॉइंट सबके लिए सेम है। पैदा होना, स्कूल जाना ,शादी करना ,मर जाना। लेकिन इन दो पॉइंट के बीच मे कुछ ऐसा कर दो की तुम्हारे ना होने पर भी याद रखे जाओ। जैसे आर्टिस्ट उनकी कला हमेशा उन्हें अमर रखती है।

कभी ऐसा लगा कि नही हो रहा ??

बहुत बार। जब रिजेक्शन मिलते है तो यही लगता है इसके लिए मैंने सब कुछ छोड़ दिया और मैं इसमे भी अच्छी नही तो मतलब मै किसी के लिए अच्छी नही हूँ। पर समझ आता है कि हमारा काम सही है पर हो सकता है अप्प्रोच ही गलत हो। आप कितनी भी अच्छी वेस्टर्न डिश बना ले पर अगर रेस्टोरेंट पंजाबी जी तो वहाँ वही चाहिए। आपका काम आपकी मेहनत आज नही तो कल रंग ज़रूर लाएगी। मै जब परेशान होती हूँ तो इंटरव्यू देखती हूँ। मेरी छोटी सी फिलोसोफी है कि जब लगे कि नही हो रहा तो क्विट करने से पहले एक कदम और चल कर देख लो। हो सकता है कि ये उम्मीद का दरवाजा नही खुल रहा पर अगला खुल जाए। उम्मीद में पता नही चलता आप कहाँ तक आ गए है। गोपाल दास जी की एक कविता मुझे हमेशा प्रेरित करती है….
“जिन मुश्किलों में मुस्कुराना हो मना,
उन मुश्किलो में मुस्कुराना धर्म है”

युथ को क्या मेसेज देना चाहते है??

बस यही की अगर आप अपने ड्रीम्स को नही छोडेंगे तो वो भी आपको नही छोडेंगे। अपने सपनो के लिए ढिठ बन जाये ज़िद्दी बन जाये। फर्क नही पड़ता कि कोई और उस पर भरोसा कर रहा है या नही अगर आपको भरोसा है तो हो ही जायेगा। एक चीज़ और बैक अप नही रखे। अगर यही करना है तो यही करना है। ऐसा नही की ये नही हुआ तो ये कर लेंगे। यही मतलब यही करना है।

तो कुछ ऐसी बातचीत हुई हमारी श्वेता सिंह से। जिनसे यही सीखने को मिलता है कि

मुश्किलें भी हार जाएगी तेरी हिम्मत के आगे,
बस तुम मुस्कुरा कर उनका सामना करना -Kashish Parwani

आप भी इनके बारे मे और जानना चाहते है तो इन्हें इंस्टाग्राम पर फॉलो कर सकते है।https://instagram.com/chhotaa_packet?igshid=zm36z2y1i7hw


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