सुनूँ बंसी की धुन सुबह शाम रे

लेखक –रामप्रकाश  राजपूत

सुनूँ बंसी की धुन सुबह शाम रे

मोरे श्याम मोरे श्याम
मोरे श्याम मोरे श्याम
मोरे श्याम मोरे श्याम मोरे श्याम रे
सुनूँ बंसी की धुन सुबह शाम रे

चाहे कल हो चाहे आज 
चाहे दिन हो चाहे रात 
चाहे घर हो चाहे गांँव 
चाहे धूप चाहे छांव रे

सुनूँ बंसी की धुन सुबह शाम रे

मोरे श्याम मोरे श्याम
मोरे श्याम मोरे श्याम
मोरे श्याम मोरे श्याम मोरे श्याम रे
सुनूँ बंसी की धुन सुबह शाम रे

इधर में उधर में मैं फिरूँ जिधर मे 
सुनना चाहूँ बाँसुरी की धुन 
थारे रंग रस मे भक्ती के इस जस मे 
ड़ूबी रहे मोरी सारी सुध

चाहे शरद हो या ग्रीष्म 
चाहे बदरा हो या शीत
मैं तू जो भी करो काम 
प्रभु ले लूं थारो नाम 
पूरे कर दो प्रभु जी मोरे काम रे

सुनूँ बंसी की धुन सुबह शाम रे

मोरे श्याम मोरे श्याम
मोरे श्याम मोरे श्याम
मोरे श्याम मोरे श्याम मोरे श्याम रे
सुनूँ बंसी की धुन सुबह शाम रे

जो हो खुशियों की फुहार 
या हो रंगों की बहार

मोहे ऐसी लगी प्रीत 
गांऊँ मीत का मैं गीत 
गा के सुनो संगीत 
थारा मिला है जो मोहे साथ रे

सुनूँ बंसी की धुन सुबह शाम रे

मोरे श्याम मोरे श्याम
मोरे श्याम मोरे श्याम
मोरे श्याम मोरे श्याम मोरे श्याम रे
सुनूँ बंसी की धुन सुबह शाम रे

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