Women Wednesday : परफेक्‍ट बनने की होड़ में इस खतरनाक बीमारी की शिकार हो रही है महिलाएं

इस हफ्ते से हर बुधवार हम मनाएंगे Women Wednesday .इस खास सेक्शन में हम महिलाओ के स्वास्थ्य, जीवन, करियर, लाइफस्टाइल के साथ आप तक पहुचांयेंगे ऐसी महिलाओ की कहानी जिसे पढ़ कर आप भी प्रेरित होंगे। तो पढ़िए हमारी खास स्टोरी।

बदलती लाइफस्‍टाइल में आजकल की महिलाओं में ऑलराउंडर और मल्‍टी-टास्किंग होने का भूत सवार होता जा रहा है। हर घर हो या दफ्तर हर जगह महिलाएं अपनी परफेक्‍ट इमेज बनाना चाहती है। परफेक्‍शन के चलते इन दिनों कई महिलाएं सुपरवुमैन सिड्रोंम की गिरफ्त में जा रही हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि ये सुपरवुमैन सिंड्रोम क्‍या होता है? ये एक तरह का मानसिक अवसाद है जो ऐसी महिलाओं में देखा जाता है, जो हर जगह परफेक्‍ट दिखना चाहती हैं और ऐसा न कर पाने के कारण वो आत्‍मग्‍लानि से भर जाती है। परफेक्‍ट दिखने का ये जुनून महिलाओं को धीरे-धीरे इस अवसाद की ओर धकेलना लगता है। जिसे सुपर वुमैन सिंड्रोम (Superwoman Syndrome) कहा जाता है। आइए जानते है इस सिंड्रोम के बारे में।

क्‍या है सुपरवुमैन सिंड्रोम?

विशेषज्ञों के अनुसार आजकल की मह‍िलाएं हर चुनौती में एकदम फिट होकर बैठना चाहती हैं। चाहे वो घर-परिवार की जिम्‍मेदारी हो या फिर कॅरियर में कोई ऊंचा मुकाम पाना हो। जिंदगी में हर भूमिका को अच्‍छे से न‍िभाने की लत वजह से कई महिलाएं सुपर वुमैन सिंड्रोम का शिकार होती जा रही हैं। अगर वो किसी जगह परफेक्‍शन में चूक जाती है तो वह खुद को ही दोष देने लगती है। इतना ही नहीं परफेक्‍ट बनने की होड़ में कभी- कभी महिलाएं डिप्रेशन का शिकार हो जाती है।

प्राथमिकताओं को करें सुनिश्चित

कॉम्‍पीटिशन के इस दौर में हर कोई परफेक्‍ट बनना चाहता हैं। ऐसे में सुपर वुमन सिंड्रोम से बचने से निपटने के लिए प्राथमिकताओं को सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। एक बात ये समझना बहुत जरुरी है कि एक वक्त में हर काम कर पाना या हर फील्ड में परफेक्ट हो पाना किसी के लिए भी संभव नहीं है। इसलिए जिस वक्त पर जो चीज ज्यादा जरूरी है, उसे ही प्राथमिकता दें।

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