कमी है तो की कोई सुनने वाला किसी ओर नहीं ….

लेखक –दिग्या सिन्हा

इस समाज की खामी ये नहीं कि यहाँ दुख हर ओर है …….
कमी है तो की कोई सुनने वाला किसी ओर नहीं ……..
हर चेहरा मायूस है ………
पर कोई चेहरा किसी का हम चेहरा नहीं ………
क्या जाता जो उसकी दास्तां सुन जाता ……..
एक पल को ही शायद ,उसकी वेदना में कुछ अपने 
जैसे टुकड़े देख पाता …….
कौन आएगा मुझे किसका इंतजार है ……..
हर दफा कभी जो एक दफा ना हुआ उसका इस दफा भी इंतजार है ……

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