खतरे में हम सभी

लेखक – पी राय राठी,भीलवाड़ा

हम आज जिस विषय को लिख कर , या बता कर आगाह कर रहे है,वो विषय है, #ग्लोबल_वार्मिंग याने  की वैश्विक भु मंडल का तापमान बढ़ना, पृथ्वी लगातार गर्म होती जा रही है। वैज्ञानिक पर्यावरण  विद, महान अनुभवी लोगों का कहना है अगर ऐसा ही चलता रहेगा,तो सम्पूर्ण विश्व को इसके गम्भीर परिणाम भुगतने होंगे। ये  वैसा ही बर्ताव है  ,जो हम  पर्यावरण को देंगे, हमें वो हमें वापस दोगुना से कहीं गुना बुरा करके लौटाएगा।परिणाम स्वरूप आने वाले खतरे  ,कहीं भयंकर बाढ़, तो कहीं भयंकर अकाल ,ये सब प्रकृति व पर्यावरण के साथ  छेड़ छाड़ के ही नतीज़े होंगे। मौसम बदलता हुआ दिखाई देगा। जिसका असर विनाशकारी होगा।

क्या_ग्लोबल_वार्मिंग  जाने-

अधिकांश लोगों को  इसके बारे में ज्यादा ज्ञात नहीं  , लोगों को नाम सुना सुना सा लगता  है, विशेष  रूप से भारत में,ये नाम टेक्निकल लगता है तापमान में वृद्वि और इसके कारण होने वाले मौसम के बदलाव   को(जिस सौ वर्षों में औसत तापमान पर,1’०फॉरेनहाइटआँका गया है)इसीके फल स्वरूप  पर्यावरण के व्यहवार में बदलाव,कहीं विध्वंसकारी  बाढ़,अत्यधिक हिमपात,या हिम ग्लेशियरों का पिघलना ,व भयानक सूखा पड़ना,समुंदर के जल स्तर का बढ़ना शामिल है। इसके प्रभाव वनस्पति जीव जन्तु सभी पर देखा जाने लगा है।दुनिया की ये एक बड़ी समस्या जिसे सही मायने में आम आदमी समझ ही नहीं सका है इसे एक  वैज्ञानिक परिभाषा समझ कर छोड़ दिया गया है मतलब जागरूकता में कमी, लोगों को अभी भी काल्पनिक लगता है,  किन्तु सत्य यही की हम भीषणता की अंतिम पराकाष्ठा के मुहाने बैठे है।

कैसे हो समस्या से निपटने के उपाय-

ये तो हमनें जान ही लिया कि अन्य जहरीली गैसों से हीभूमंडल का तापमान बढ़ रहा है। हमें इसके बचने के उपायों पर गहन मन्त्रणा करनी ही होंगी, सी एस सी गैसों के उत्सर्जन को रोकना ही होंगा।दैनिक जीवन में उपयोग में आने वाले ऐसी, फ्रिज एअरकंडीशनर, कुलिंग मशीनों के इस्तेमाल माल को रोकना होगा। औधोगिक इकाइयों, चिमनियों से निलने वाले धुंए, जो तापमान वृद्धि के कारक है। वृक्षों की कटाई व जंगलों के सरंक्षण पर बल देना होगा, कचरे व उधोग धंधों से निकलने वाले अपशिष्ट पर्दाथ को रिसाकलिंग पर ध्यान देना होगा। हमें पहले से औऱ अधिक ऊर्जा के सुरक्षित मानकों पे ध्यान लगाना होगा। हमें प्रकति को सहज के रखना होगा। हम प्रकति को प्रेम देकर ही प्रकृति का प्रेम पा सकेंगे, हमे निश्चित ही चिंतन मनन करना ही होंगा।

इनकी तरह आप भी अपनी रचना हमे भेज सकते है। हम उन्हें प्रकाशित करेंगे आपके नाम और तस्वीर के साथ। अपनी रचना orsunaonewsportal@gmail.com पर भेज सकते है।

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