Jabalpur Icon : माँ ने सिर्फ मुझे नहीं मेरे म्यूजिक को भी जन्म दिया, जानिए सारेगामापा की विनर इशिता की कहानी उन्ही की ज़ुबानी

लाइफ में फेलियर आते रहते है पर ये ज़रूरी नहीं की आपको झुकाने के लिए आते है वो आपको आगे बढ़ाने के लिए आते है, ये कहना था जबलपुर की लाडो यानी इशिता विश्वकर्मा का। इशिता अब किसी परिचय की मोहताज नहीं है बल्कि उनके कारण जबलपुर को पुरे देश में जाना जा रहा है। सारेगामापा की विनर बनने के बाद इशिता अब अपने शहर आ गयी है और उन्होंने अपने कई एक्सपीरियंस हमारे साथ शेयर किये। पढ़िए की इशिता orsunao.com से खास बातचीत।

सारेगामापा की विंनर का ख़िताब पाकर कैसा महसूस कर रही है

ये एक ऐसा लम्हा था जिसे कभी नहीं भूल सकती ये सब एक सपने जैसा लग रहा है। बचपन से ये चाहती थी की जबलपुर को रिप्रेजेंट करूँ। लेकिन यहाँ से कहानी शुरू होती है। अभी बहुत कुछ करना है अपने लिए और जबलपुर के लिए।मुझे प्लेबैक सिंगर बनना है और यहाँ से मेरी मेहनत दुगनी होने वाली है।

आपकी सफलता के पीछे किसका हाथ है?

मेरी माँ का । जब मैं पांच साल की थी तभी से मेरी माँ ने मेरा हुनर पहचान कर मुझे आगे बढ़ाया। जब आप एक स्टेज पर पहुंच जाते है तब तो सब साथ देते है लेकिन उस स्टेज तक लेकर जाने में मेरी माँ का अहम रोल है। जब कोई साथ नहीं था तब मेरी माँ ही थी। मेरी माँ ही मेरा सपोर्ट सिस्टम है। माँ ने सिर्फ मुझे नहीं मेरे म्यूजिक को भी जन्म दिया

असफलता को कैसे हैंडल किया ?

आमतौर पर लोग यही देखते है की सारेगामापा में गयी और जीत कर आ गयी। उसके पीछे की मेहनत और असफलता बहुत कम लोग ही देख पाते है। इससे पहले भी मैं कई शोज में गयी कही टॉप 12 कही टॉप 10 तो कही इससे पीछे भी रही। पर ये असफलता झुकाने के लिए नहीं बल्कि आगे बढ़ाने के लिए आयी थी। जब मैं लिटिल चैम्प के मंच से जा रही थी तो उस मंच से वादा किया था एक दिन वापिस आउंगी और तब लम्बे समय के लिए। शायद यही वो ज़िद थी जिसने मुझे विनर बनाया।

इतने बड़े मंच पर कभी डर लगा ?

मैं वहां सबसे छोटी थी इसलिए शुरुवात में थोड़ा डर था पर मेरे ऊपर ऐसा हाथ है भगवान् का की जहाँ मुझे डर होता है वही से सबसे ज्यादा सपोर्ट मिलता है। मतलब जब मेरा नाम विनर घोषित हुआ तो बैक स्टेज पर मेरे साथी भी बेहद खुश थे ये मेरे लिए बहुत बड़ी बात है।

सेलेब्रिटी बनकर कैसा लग रहा है ?

बहुत अच्छा अभी बहुत एन्जॉय कर रही हूँ ये जनता ही है जो हमे बनाती है जनता के प्यार की बेहद शुक्रगुज़ार हूँ

युवाओ से क्या कहना चाहती है?

बस इतना ही कहना चाहती हूँ की हर किसी में कोई न कोई हुनर होता है बस ज़रूरत है सपोर्ट की। ये सपोर्ट मिलता है अपने घर से। परिवार का साथ बेहद ज़रूरी है ।

इशिता की पेरेंट्स ( तेजल विश्वकर्मा माता और अंजनी कुमार विश्वकर्मा पिता ) ने भी हमारे साथ अपने अनुभव साझा किये।

कैसा महसूस कर रहे है आपकी बेटी की इतनी बड़ी सफलता पर ?

ये इतनी अच्छी फीलिंग है जिसे शब्दों में बयां नहीं कर सकते। ये हमारा भी सपना था जिसे इशिता ने पूरा किया।

बच्चो की सक्सेस में पेरेंट्स का क्या रोल रहता है ?

बहुत बड़ा रोल रहता है। पेरेंट्स को समझना नहीं की अब वो दौर नहीं है जिसमे सिर्फ डॉक्टर इंजीनयर ही प्रोफेशन है अब समय है बदलाव का । हर फिल्ड में स्कोप है बस जो भी करे पुरे मन से करे।

ये सफर कैसा रहा ?

बड़ा ही मज़ेदार रहा ये सफर। ये सब उसकी निरंतर मेहनत का नतीजा है। सफलता का कोई शार्ट कट नहीं होता। बस आपकी मेहनत ही आपको आगे लेकर जाती है। लोगो की नहीं बस अपने दिल की सुनी और उसी ज़िद का रिजल्ट इस विनिंग ट्रॉफी के रूप में सामने है।।।

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