कैसे कराएं बच्चों को गुड और बैड टच से पहचान

विचार – आयुषी गोस्वामी, जबलपुर।

दुर्भाग्य से आज हमें दैनिक रूप से यौन शोषण की खबरों का सामना करना पड़ता है। इसमें बच्चों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। ऐसी परिस्थिति में आवश्यक है कि हम अपने परिवार में इस विषय को लेकर जागरूकता लाने का प्रयास करें। नीचे दिए गए बिंदु आपके काम आने में समर्थ है, कृपया इन्हें जरूर पढ़ें।

1) बच्चों के साथ लें धीरज से काम- यौन जानकारी ज्ञात ना होने के कारण बच्चों को पहली बार यह बातें समझने में कठिनाई होती है। वे स्वयं असुविधाजनक महसूस करते हैं। परंतु यह आपका कर्तव्य है कि आप बच्चों को प्यार, धैर्य एवं सही शब्दों का चयन करके इस विषय से अवगत कराएं।

2) बच्चों को सरलता से पूरी जानकारी दें- हम अधिकतर अपने विचार तो सामने रख देते हैं परंतु बच्चों के दिमाग को पढ़ नहीं पाते। कृपया बच्चों के मन में क्या प्रश्न या शंका उत्पन्न हो रही है यह जानने का प्रयास करें और कोशिश करें उन्हें समझाने की। साथ ही प्राइवेट पार्ट्स के बारे में पूरी जानकारी देने से ना हिचकिचाएं। उनके अभिभावक नहीं बल्कि दोस्त बनकर बात करें। 

3) बच्चों को बताएं भरोसे का मतलब- जिस तरह से हम बच्चों को यह सिखाते हैं कि जब कोई अनजान व्यक्ति कुछ खाने को दें तो वह नहीं खाना है और ना ही उसके साथ कहीं जाना है। उसी तरह से हमें उन्हें यह भी सिखाना होगा कि परिवार एवं दोस्तों में किस व्यक्ति पर विश्वास करना है और किस पर नहीं।

4) लोग आपके बच्चों से कैसे पेश आते हैं उस पर रखें कड़ी नज़र- कभी भी अपने बच्चों को किसी दूसरे व्यक्ति के साथ अकेला न छोड़ें। अक्सर हम गोद लेने व चूमने जैसी क्रियाओं पर आपत्ति नहीं जताते हैं परंतु हो सकता है कि सामने वाले के इरादे सही ना हो। इसलिए आवश्यक है कि बच्चे सब से थोड़ी दूरी बनाकर चलें और उनमें ‘ना’ कहने की क्षमता हो।

5) बच्चों को डरने या घबराने की आवश्यकता नहीं- बच्चों को यह विश्वास दिलाना जरूरी है कि वह आपके साथ खुलकर किसी भी विषय से संबंधित बात कर सकते हैं। किसी भी घटना के दौरान उन्हें घबराने की जगह आत्मविश्वास से समस्या का सामना करना है। अगर बच्चा कुछ बता रहा है तो उसे डांट कर शांत ना करवाएं। प्रयास करें कि वह हर बात आपको बताए और उस पर आप ठोस कदम उठा पाएं।

6) बच्चों को स्वयं जागरूक और सशक्त होना है जरूरी- बच्चों को समझाएं कि यौन शोषण/अच्छा और बुरा स्पर्श क्या होता है और ऐसी स्थिति आने पर हमें क्या करना चाहिए। उदाहरण:- गलत स्पर्श पर सबसे पहले चिल्लाना, इसके साथ ही ज़ोर से धकेलना और भागना काम आ सकता है।

 

 

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