Jabalpur Icon: 3rd क्लास में पहली बार देखा था कम्प्यूटर,उसी ने बनाया करियर

जीवन में आपके पास दो विकल्प होते है पहला या तो आप उसे सीमित दायरे में जीयें और दूसरा उसे बडे पैमाने पर जीकर एक्सपलोर करें। ये कहना है हमारे जबलपुर आईकाॅन का। आइए जानते है उनके बारे में।

Ashik Kumar Saxena, Jabalpur, Madhya Pradesh

फाउंडर-SEVENI INTERNET SERVICES

वेबसाइट- www.seveni.net

मैं सॉफ्टवेयर एंड वेबसाइट डेवलपर हूँ. और मैंने अपनी एक IT कंपनी स्टार्ट किया था 2010 में जिसका नाम “SEVENI INTERNET SERVICES” है और साथ ही क्लाउड कंप्यूटिंग कंसलटेंट, सिक्योरिटी एडवाइजर, डेडिकेटेड सर्वर, सर्वर मैनेजमेंट, में डील करते है.

अर्ली लाइफ:बचपन का सपना

मैं बचपन से ही इंजीनियर बनना चाहता था. जो भी पूछता था बड़े हो कर क्या बनोगे मेरा जवाब “इंजीनियर” रहता था. जब मैं 3rd क्लास में था तब पहली बार मैंने कंप्यूटर देखा था. उस समय मुझे बिलकुल भी नहीं पता था की कंप्यूटर होता भी क्या है. तभी से धीरे धीरे कंप्यूटर को जानने की इच्छा बढ़ने लगी थी. स्कूल में कंप्यूटर पीरियड में मैं सिर्फ अपना नाम टाइप करता था और उसी में खुश हो जाता था. फिर मैं  जब 5th क्लास में गया तब कंप्यूटर में गेम खेलना स्टार्ट किया. उसके बाद मेरी कंप्यूटर चलाने की क्युरीआसिटी बढ़ती चली जा रही थी. घर आने के बाद मैं ज़िद करने लगा की मुझे भी कंप्यूटर चाहिए लेकिन उस टाइम लोअर मिडिल क्लास फॅमिली होने के कारण पापा एफर्ट नहीं कर सकते थे. फिर कुछ समय बाद मुझे साइबर कैफ़े का पता चला मैं वहां जा कर कंप्यूटर 10 रुपया में 1 घंटा चलता था. साइबर कैफ़े से ही पता चला था इंटरनेट के बारे में की इसके जरिये गेम खेल सकते है.

फिर पापा के एक फ्रेंड थे जिनकी कंप्यूटर हार्डवेयर की शॉप थी तब पापा ने अपने फ्रेंड से बात किये उसके बाद उन्होंने मुझे अपनी कंप्यूटर हार्डवेयर की शॉप में बुला लिया ताकि मैं उनके साथ काम करू. वहां जा कर मैं कंप्यूटर हार्डवेयर का काम  देखता था और देख देख कर मैं सीखता गया. फिर उनकी शॉप में ही इंटरनेट चलाता था. मैंने तब पहली बार अपनी email id बनाया था. वही पर मैं कंप्यूटर हार्डवेयर का काम करने लगा जैसे कंप्यूटर असेम्बल करना, कंप्यूटर फॉर्मेट करना, कीबोर्ड-माउस बनाना और मैं काम करने की सैलरी नहीं लेता था. मैंने वहां पर चार महीने काम किया. साथ ही वहां खूब इंटरनेट चलाता था. इंटरनेट यूज़ करते करते वेबसाइट शब्द पता चला.फिर मैं मम्मी से पैसे लेकर साइबर कैफ़े जाने लगा और वेबसाइट के बारे में रिसर्च शुरू कर दिया की आखिर ये होता क्या है. रिसर्च के दौरान पता चला की वेबसाइट को बनाने के लिए html की प्रोग्रामिंग करनी पड़ती है. और वेबसाइट रन करने के लिए डोमेन नाम, एंड सर्वर की ज़रुरत पड़ती है.

 करियर:ऐसी हुई सफर की शुरुआत

पापा से 1 लखरुपय लेकर FMCG का काम स्टार्ट किया. मेरे पास बहुत सी कंपनी की डिस्ट्रीब्यूशनशिप थी, जबलपुर की किराना/जनरल शॉप्स में सामान देता था. ये काम काफी अच्छा चलने लगा. इसी काम की वजह से जबलपुर में हर शॉप्स वाले पहचानने लगे थे. ये काम मैंने चार साल किया. लेकिन इस काम में सटिस्फैक्शन नहीं था. क्यूंकि मुझे इंजीनियर बनना था. और ये मेरे इंटरेस्ट का काम नहीं था. फिर मैंने पूरा पैसा पापा को वापस कर के ये काम बंद कर दिया था.

2010में मैंने वेब डिजाइनिंग की कंपनी स्टार्ट किया जिसका नाम “Techno InfoWeb Solutions” इसमें मैं वेब डिजाइनिंग, डोमेन रजिस्ट्रेशन, वेब होस्टिंग करता था. लेकिन इस काम में मेरी कोई पहचान नहीं थी कही से भी कोई काम नहीं मिलता था और उस टाइम लोगों को इतना पता नहीं था की वेब डिज़ाइन होता क्या है. इंटरनेट का बिल और अदर एक्सपेंसेस देने के लिए मैंने अपने फ्रेंड्स को इंटरनेट शेयर किया ताकि उनसे जो पैसे मिले उस पैसे से मैं अपने इंटरनेट का बिल और अदर एक्सपेंसेस पे करता था. 

एक साल बाद 2011 में मैंने “Techno InfoWeb Solutions” से नाम बदलकर “Seveni Internet Services”नाम कर दिया था. काम की शुरुआत हुई सबसे पहले डोमेन रजिस्ट्रेशन एंड वेब होस्टिंग से.

स्ट्रगल:कभी नही मानी हार

जब मैं काम के लिए जाता था लोग एजुकेशन के बारे में  पूछते थे तब मैं सिर्फ 12th पास था. फिर मुझे थोड़ी प्रॉब्लम हुई क्यूंकि यहाँ पर एजुकेशन को ज़्यादा इम्पोर्टेंस देते है तब मैंने कॉलेज में एडमिशन लिया 2011. काम के साथ ही पढाई चलती रही. मुझे 5-6 महीनो में एक वेबसाइट डिजाइनिंग के लिए मिलती थी. मुझे बहुत लोगो के पास जाना पड़ता था लेकिन कोई काम नहीं देता था उस टाइम मैं फेमस नहीं था नहीं कोई पहचान थी. फिर 2013 से मेरा काम थोड़ा बेटर हुआ. कुछ लोग काम देने लगे. उसी साल मैंने लगभग 13 वेबसाइट डिज़ाइन किया था. ये मेरे करियर की पहली शुरुआत थी जब मैंने 13 वेबसाइट डिज़ाइन किया. 2014 में फिर मुझे स्टार्टिंग में प्रॉब्लम हुई लेकिन साल के आखिरी में मेरा काम बढ़ने लगा. लोगों का ट्रस्ट मिलने लगा.लोगों से पहचानभी होने लगी थी. फिर धीरे-धीरे कंपनी को भी जानने लगे थे.अब मेरी कंपनी को 8 साल हो गया है. लेकिन अब कंपनी के नाम से काम आता है. लोगों के बीच मेरा नाम परचित हो गया है. लोग मुझे मेरे काम की वजह से जानते है. मुझे न सिर्फ जबलपुर से बल्कि दूसरे शहरों से भी काम के लिए एप्रोच किया जाता है. मुझे कुछ प्रोजेक्ट अब्रॉड से भी भी मिल रहे है.

बदलाव;हर पल बदला है खुद को 

पहले वेब डिजाइनिंग के लिए मैंने ये लैंग्वेज सीखा जिसमे (html, CSS, JavaScript, JQuery) थी और ये मैंने ऑनलाइन टुटोरिअल्स के थ्रू सीखा. वेब डेवलपमेंट के लिए मैंने php (Symfony, Laravel, Codeigniter)  प्रोग्रामिंग ऑनलाइन टुटोरिअल्स के थ्रू सीखा. कुछ टाइम बाद Java (Springs, hibernate) में भी वेब एप्लीकेशन डेवेलोप करना स्टार्ट कर दिया. 2015 से सर्वर मैनेजमेंट के साथ ही क्लाउड कंप्यूटिंग का भी काम स्टार्ट कर दिया. फिर 2018 से मैं एंड्राइड एप्लीकेशन डेवलपमेंट का काम स्टार्ट कर दिया.

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