ये वक़्त है किसी का ना हुआ खाक तुम्हारा होगा 

लेखक – उमैैैैर सिद्दीकी,हुसैन गंज।

बन जायेगा ये भी ज़ालिम कल ज़ुल्म तुम्हारा सहते सहते 

सो गया है जो बच्चा अभी रहम साहब रहम कहते कहते 

ये वक़्त है किसी का ना हुआ खाक तुम्हारा होगा 

आ ही जाओगे एक दिन तुमभी सड़क पे यार महल में रहते रहते

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