अंतराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस आज : कभी देते जीवन का पाठ, कभी लेते तकनीक का ज्ञान

कहते है बच्चों में बुर्जुग अपना बचपन फिर से जीते हैं। शायद यही वजह है कि उनका तीसरी पीढ़ी से खास ही लगाव होता है। बुर्जुग और बच्चे एक दूसरे का सहारा होते है। आजकल के दौर में कई बार माता पिता दोनो अपने घर के साथ काम भी करते हैं। ऐसे में यही तो बच्चों का ध्यान रखते है। ये दोनों के लिए ही बेहतर होता है। आज का दिन इन्ही बुर्जुगों के नाम है। जी हाँ आज है अंतराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस। आज हम आपको बताते है कैसे बुजुर्ग और तीसरी पीढ़ी एक दूसरे के पूरक होते है। कभी यही बुजुर्ग जीवन का पाठ पढ़ाते है और फिर वही बच्चे उन्हें तकनीक का ज्ञान देते है। इसी कारण इनके रिश्ते को समझना आसान नही होता।

पहले सिखाते है जीवन का पाठ

तीसरी पीढ़ी के साथ जिस तरह से बुजुर्ग अपने जीवन को शेयर करते है वह अनोखा ही होता है। वो बच्चों में अच्छे संस्कार डालते है। उन्हें जीवन का पाठ पढ़ाते है। साथ ही स्कूल के काम मे भी उनकी मदद करते है। उन्हे कहानी के माध्यम से पूरी दुनिया का ज्ञान देते है।

फिर सीखते तकनीक का ज्ञान

आज का दौर तकनीक का दौर है। ऐसे में बुर्जुग भी क्यों पीछे रहे। इसी बात का ध्यान रखते हुए बच्चे अपने दादा दादी नाना नानी को तकनीक का ज्ञान देते है। इस प्रकार दोनो पीढ़ियां दोस्तो की तरह एक दूसरे के लिए हमेशा तैयार रहती है। 

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