जबलपुर : मोर पंख से तैयार किये गणपति

शरद ताम्रकार, नाम तो आम सा लगता है पर काम आम नहीं है । पिछले 24 सालों में वे कभी गेंद तो कभी सीडी और कभी अक्षरों के हिंदी-अंग्रेजी के समूह से प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश की अद्भुत प्रतिमा बना चुके हैं। पिछले साल उन्होंने हल्दी की गांठों से प्रतिमा तैयार की थी। इस बार मोर पंखों का इस्तेमाल किया गया है। खास बात ये है कि वे स्वयं ही प्रतिमा तैयार करते हैं और इसमें किसी की मदद भी नहीं लेते हैं। प्रतिमा निर्माण के बाद गणेश चतुर्थी के दिन ही स्थापना की जाती है। और दसों दिन तक भगवान गणेश की सुबहशा म आराधना की जाती है।

पिछले 2 माह से कर रहे तैयारी

शरद ने इस बार भगवान गणेश की प्रतिमा मोर पंख से तैयार की है। इस प्रतिमा निर्माण में करीब 6 हजार रुपए खर्च आया है। शरद ने बताया कि 2 माह पूर्व उन्होंने प्रतिमा निर्माण शुरू कर दिया था। प्रतिमा निर्माण का कार्य वे सिर्फ रात में ही करते हैं।

पर्यावरण बचाने का प्रयास

शरद का कहना है कि उनका उद्देश्य रहता है कि पर्यावरण को बचाने का प्रयास किया जाए। प्रतिमा निर्माण में रंगों का चयन भी वे स्वयं करते हैं और ईको फ्रेंडली रंगों का चयन करते हैं। वहीं जो प्रतिमा विसर्जन लायक रखते हैं सिर्फ उसी का विसर्जन किया जाता है। उन्होंने बताया कि फिलिंग आर्ट के कागज के गणेशजी उन्होंने विसर्जन नहीं किए थे। वहीं इस बार मोर पंख के गणेश जी भी वे विसर्जन नहीं करेंगे।

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