जबलपुर : रादुविवि में त्रि दिवसीय हिंदी दिवस समारोह का समापन

हमें हिन्दी के प्रति स्वधर्म का पालन करना होगा। भाषा किसी भी समाज की संस्कृति एवं आत्म सम्मान का बोध कराती है। उक्त विचार कुलपति प्रो. कपिल देव मिश्र ने व्यक्त किये ।अवसर था रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के हिन्दी एवं भाषा विज्ञान विभाग के भारतेन्दु सभागार में आयोजित त्रि-दिवसीय हिन्दी दिवस समारोह के समापन एवं प्रमाण- पत्र वितरण कार्यक्रम का । कार्यक्रम माननीय कुलपति जी की अध्यक्षता, मुख्य वक्ता हिन्दी के उद्भट विद्वान डाॅ. हरिशंकर दुबे,सारस्वत आतिथ्य संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. कमल नयन शुक्ल , विशिष्ट आतिथ्य आकाशवाणी के पूर्व निदेशक, डाॅ. बैद्यनाथ गौतम  एवं विभागाध्यक्ष डाॅ. धीरेन्द्र पाठक की उपस्थिति में आयोजित हुआ। डाॅ. दुबे ने कहा कि राष्ट्र की संस्कृति एवं धर्म को बचाने के लिये हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाना होगा।

 डाला हिन्दी के सांस्कृतिक, व्यवहारिक,दायित्वों पर प्रकाश

प्रो. शुक्ल ने संस्कृत और हिन्दी के सम्बन्धों एवं हिन्दी के सांस्कृतिक, व्यवहारिक,दायित्वों पर प्रकाश डाला और लोकाचार में प्रयोग होने वाले कई शब्दों के बारे में बताया कि इसकी जननी संस्कृत है। डाॅ. गौतम ने हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आकाशवाणी की भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के आरम्भ में विभागाध्यक्ष डाॅ. पाठक ने अतिथियों का वाचिक स्वागत एवं कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत किया। अतिथि विद्वान डाॅ. आशा रानी ने कार्यक्रम का संचालन, अतिथि विद्वान डाॅ. सोना पाठक ने आभार प्रर्दशन किया। इस अवसर पर प्रो बी.के साहू, प्रो. कमलेश मिश्र, प्रो. सुभाष शर्मा, डाॅ. ए.के. गिल, डाॅ. लोकेश श्रीवास्तव, उमाशंकर मिश्र, दीपक कुमार, उमाकांत नाग, टीका राम, ज्ञानेष पाण्डेय, त्रिभुवन गिरि, विजय कुमार यादव एवं प्रमिला सहित विभाग के सभी शाधार्थी एवं छात्र/छात्राओं उपस्थित रहे।

 

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