Asian Games में देश को पदक दिलाने वाले हरीश चाय बेचने को मजबूर

एशियाई खेलों में भारत के लिए सेपकटकरा में ब्रॉन्ज जीतने वाले हरीश कुमार चाय बेचने को मजबूर हैं। हाल ही में वह अपनी पिता की चाय की दुकान पर काम करते नजर आए। इनका कहना है कि ब्रॉन्ज मेडल शायद मेरी जिद ही थी जो आज मुझे लोग एशियाड का चैंपियन कह कर पुकार रहे हैं, वर्ना हालात और मजबूरियों ने मुझे एक चाय वाला बनाने की ठानी हुई थी। हरीश के पिता मदनलाल का चाय का स्टॉल, जो कॉलोनी के बाहर ही एक छप्पर के नीचे बना हुआ है और उस स्टॉल से पेट भरने वाले 7 लोग। कई बार हरीश ने चाय भी बेची है, मगर खेल को नहीं छोड़ा। उनके लिए एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल तक का यह सफर काफी परेशानियों भरा रहा है। न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में हरीश कुमार ने खुलकर बताया कि उनका परिवार बड़ा है और आय का श्रोत कम है। हरीश ने कहा कि मैं चाय की दुकान पर पिता की मदद करता हूं। इसके साथ ही 2 बजे से 6 बजे तक चार घंटे खेल का अभ्यास करता हूं।उन्होंने कहा कि परिवार के बेहतर भविष्य के लिए अच्छी नौकरी करना चाहता हूं।

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