आँसुओ को पनाह नहीं मिलती

लेखक – पी राय राठी,भीलवाड़ा दर्दे ए दिल की किसी को दवा नहीं मिलती तो कभी आँसुओं को_पनाह_नहीं_मिलती। मुद्दते हो गई अपने आप में

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मेरी कलम से..एक कविता हनुमानजी की धर्म-जाति बताने वालों के विरोध में..

लेखक – गौरव शर्मा,हरसूद(म.प्र.) जात पांत और धर्म के चक्र में फंसे पड़े भगवान, बन जाते हैं दलित कभी बना दिए जाते मुसलमान…. जिस

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हे !राम आगे कितना भयावह होगा देश ?

लेखक – चन्दन कुमार विश्वास अररिया बिहार हे राम … मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति लिए किसको नहीं मारता ? हे राम ! मनुष्य को

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तन्हाई:एक रचना

लेखक –  शशि कांत श्रीवास्तव , मोहाली -पंजाब नम आंखों की कोरों से  वह तुम्हे खोजती, प्राण -प्रिये  तन्हाई  के वीराने में –मै  खोल –पोटली यादों

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